सोमवार, अगस्त 02, 2010

भरा भी और खाली भी


हिन्दुस्तान में आकाशवाणी का बहुत बड़ा योगदान है,जिसे हर वक्त याद किया जा सकता है,जनजागरण हो या सूचना के सार्वजनीकरण की बात हो,हम बहुत हद तक एक दौर में आकाशवाणी पर निर्भर होने के साथ -साथ ही उस पर विश्वास किया करते थे. विश्वास तो अभी भी जारी है मगर सूचना के स्त्रोत  अब बहुत से आ निकले हैं.आज एक बात गौरतलब है कि आकाशवाणी में बहुत सालों से उदघोषकों की कोई नियमित भर्ती नहीं निकली है.सालों से केवल और केवल नैमेत्तिक उद्घोषक ही काम करते रहे हैं.उन्हें जरुरत के मुताबिक़ बुला लिया जाता है और मेहनताना  दिया जाता है,महीने भर में एक से लेकर छ; दिन के लिए बुलाया जाता है.हालांकि मेरे विचार में आकाशवाणी के लिए काम करना ही बहुत महत्व की बात है.यहाँ हम  हमारे विचारों को हम बहुत सारे लोगों तक इस मंच के ज़रिये पहुचा सकते है.एक बात और कि अब  वो ज़माना नहीं रहा जब मौहल्ले का एक लड़का रेडियो  की ड्यूटी करके आता था तो उसे आने पर गली के लोग बड़ी शान से आदर से देखते  थे.आज लगभग पूरा-पूरा आकाशवाणी अपनी नियमित कर्मचारियों को  सेवानिवृत कर रहा है वहीं नैमित्तिक उद्घोषक के भरोसे ही पूरा तंत्र चल रहा है.अपने -अपने विचार में ये खाली  भी है और भरा-भरा भी.यहाँ संगीत के अथाह भण्डार है,अनुशासन है,जीवन है,नयापन ही,आदर है,लगातार सिखाना है.